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Lalach ki bhatti me

 लालच की भट्टी में, भावनाएं गलाने चला है, गीता बाइबल क़ुरआन का सार,  तो तू समझा नहीं, मंगल पर बस्ती बसाने चला है, इंसानियत को हारते देख, हैवानियत है हंसती, अपने कर्मों से तू अपनी,  हस्ती‌ मिटाने  चला है। पढ़ी किताबें कितनी मोटी! असल बात खुद नहीं समझा , ज़माने को समझाने चला है।        -GD Verma Lecturer