Chapter -1-4
पढ़ने जा रहा हूं अगर लेट हो गया तो वहीं सोऊंगा।वहां जाने के बाद ना तो बच्चों के शोर शराबे और मस्ती में ना तो पढ़ाई हो पाती और ना ही सो पाता दूसरा केमिकल लोचा जो उनके घर में टीवी देखने को मजबूर करता कभी ये फिल्म कभी वो फिल्म कभी अलिफ लैला कभी शक्तिमान कभी चंद्रकांता ।पढ़ाई गई तेल लेने। और रात को टीवी बन्द होने के बाद वही कूकर्म जो अमूमन सभी दोस्त आपस में करते हैं ।
हमारे मिलने वाले मोहन जी जो की मेरे पिताजी के मित्र , ठेकेदार और हमारे पहले मकान मालिक थे वो कहते थे की मुझमें कुछ विलक्षण प्रतिभा थी और इसको पढाऔ ये कुछ ज़ऱूर करेगा। पिताजी को समझाकर पढा़ने को राज़ी कर लिया जिस वहज से मुझे दूसरी कक्षा के बजाय सीधे ही पांचवी में जबकि मेरी पढ़ाई की उम्र के हिसाब से मुझे तीसरी में होना चाहिए था।स्कूल ने मेरे साधारण टैस्ट लिया और पांचवी में प्रवेश दे दिया । पांचवी और छठी कक्षा में था तो पड़ोस का एक मकान छोड़कर दूसरे मकान में बैंक का कैशियर रहता था उसके घर रंगीन टीवी था और उसके तीन लड़कियां थी जो की मुझसे जूनियर थी मैं उनमें से बीच वाली को पढ़ाता था जो की छत से गिरने की वजह से दोनों पैर टूटने की वजह से स्कूल नहीं जा सकती थी तो मैं ही उसे पढ़ाता था जिसकी वजह से वो मुझे टीवी देखने से मना नहीं करते थे।मैं रात 12बजे तक टीवी देखता था और फिर घर वापस आता था लेकिन दिन के समय वो बच्चों की ज्यादा भीड़ होने की वजह से टीवी बंद कर देते थे तो बुरा लगता था।
सातवीं कक्षा के समय की बात रही होगी की जब हम तैरने के मज़े लेने लिए मंशा नदी में जाया करते थे एक दिन की बात 10=15 लड़के रहे होंगे नदी पर नहाने का प्लान बनाया और निकल पडे़ मैं भी स्कूल में पढ़ाई नहीं होगी आज लंच बाद अपनी बकरियां चराने का बहाना कर नदी की और निकल पड़ा बकरियों को चरने के लिए छोड़ यारों के साथ कूद पडा़ नहाने 16 लड़कों होंगे जिनमें आठ दस ने अपने सारे कपडें निकालकर उतार कर नहाने आनंद ले रहे थे जिनमें से एक मुझसे सीनियर लड़का था भीम जिसने की अंडरवेयर पहन रखा था अपनी तैराकी शेखी बघारने के लिए ऊंचाई से कलाबाजियां करता हुआ सिर बल कूदा और कुछ सैकेण्डों के बाद सिर पकड़े निकला और सिर से खून निकल रहा था पानी में किसी पत्थर से उसका सिर टकरा गया था जिस वजह से चोट लग गई थी सबकी आंखें उसपर ही टिक गई और सबका ध्यान उसमें ही लग गया और पता ही नहीं चला की कब हमारे एक दोस्त की मां जो की एक हाथ में पिटाई के लिए लकड़ी ले रखी थी सबको सबक सिखाने के लिए सारे कपड़ों को उठाकर चल दी जब वो थोड़ी दूर निकली तो हम में से किसी की नजर कपड़ों पर पड़ीं देखा तो राजू की मां मैन रोड कि तरफ जा रही थी।जैसै ही सबको पता उसके पीछे पीछे विनतियां करते दौड़ पड़े इतनी देर में वो मैन रोड पर आ गई अब लड़के हाथ जोड़े पीछे भाग रहे थे रोड़पर गाड़ियां आ जा रही थी आधे ज्यादा लड़के हाथ जोड़े दोस्त की अम्मा के पीछे दौड़ रहे थे और आधे अपने दोनों हाथों से गुप्तांग छुपाके ।दोस्त की मां डंडा फटकारती चल रही थी तुम और आओ स्कूल से भाग भागकर तुम्हे मैं बताती हूं।
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