Chapter-1-5

 मैंने बारहवीं पास की और ज़िले के बडे़ सरकारी कोलेज में एडमिशन लिया।उसी कोलेज के पहले ही दिन मेरा एक पांचवी कक्षा में साथ पढ़ा हुआ आठ साल बाद मिला ।वह अपने दोस्तों के साथ था।वह पैसे वाला था और वैसे ही उसके दोस्त लग रहे थे ।मैं उससे मुलाक़ात करना चाह रहा था किन्तु हिचकिचा रहा था उसी दिन  दो चार बार आमना सामना हुआ लेकिन वह शायद पहचान नहीं पाया ।मैं कैम्पस की एक सीट पर जाकर बैठ गया।वह भी अपने दोस्तों से अलग होकर मेरी बगल वाली सीट पर आकर बैठ गया।शायद उसने हल्का सा पहचान लिया था पर उसने मुझसे बात नहीं की। शुरुआत मैंने ही की क्या वह मेरे गांव में कभी गया था पांचवी में पढ़ता था?उसने कहा हां फिर मैंने कहा  तुम्हारा नाम ऋषि है?उसने कहा हां,मुझे पहचाना ..तुम वही हो जिसके एक हाथ में दो अंगूठे हैं इतना कहते ही दोनों हंसने लगे और गले लगा लिया शायद उसे मेरा नाम याद नहीं था।

 वो उससे आखिरी मुलाकात थी आजतक दुबारा मिलान नहीं हुआ ।वहीं एक नया दोस्त मिला जो की मेरे ही‌ विषय का था तुषार।

एक दिन मैं यूं ही‌ बैठा था वह अपने दोस्तों के साथ अपने ही एक दोस्त का फोन लेकर किसी लड़की के भाई के पास फोन लगा दिया जो की उसके साथ में खड़े दोस्त की गर्लफ्रेंड थी ।हम सभी उसकी हरकत को मज़ाक समझकर हंस रहे थे की शायद वो यूं ही‌ बिना फ़ोन लगाए मज़ाक कर रहा था पर हमारी हंसी तब काफ़ूर हुई जब उसने स्पीकर ओन कर दिया।वह उसको बोल रहा था की मेरा दोस्त आपकी बहन से प्यार करता है और शादी करना चाहता है दूसरी तरफ़ से गालियां मिल रही थी।और वो मज़े लिए जा रहा था ।तुषार का दोस्त फ़ोन छिनने की कोशिश कर रहा था और वो फोन पर सहज भाव से बात करता जा रहा था।हम सब हंस भी रहे थे और गंभीर भी हो रहे थे ।

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