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Lalach ki bhatti me

 लालच की भट्टी में, भावनाएं गलाने चला है, गीता बाइबल क़ुरआन का सार,  तो तू समझा नहीं, मंगल पर बस्ती बसाने चला है, इंसानियत को हारते देख, हैवानियत है हंसती, अपने कर्मों से तू अपनी,  हस्ती‌ मिटाने  चला है। पढ़ी किताबें कितनी मोटी! असल बात खुद नहीं समझा , ज़माने को समझाने चला है।        -GD Verma Lecturer

Chapter 2-5

 दो -चार दिन गुज़र गए।एक दिन हम कमरे पर पढ़ाई कर रहे थे की अचानक ही अवि के पापा आए आदर सम्मान कर के बाद उन्होने मोबाइल यह कहते हुए मेरे हाथ में दिया कि अवि तुझसे मज़ाक कर रहा था वो चाहता था की तू उसका ड्राइंग की फाइल बनाएगा तब वह लौटा देगा।मैंने ख़ुशी और धन्यवाद के साथ वो ले लिया मैं  मन ही  मन में जनता था की वो अपने लड़के का बचाव चतुराई से कर रहे थे जबकि सारी कहानी से वो वाक़िफ़ ही नहीं थे।  बीए फाइनल के दौरान मेरी माताजी कई बार बीमार पड़ीं । जब तक दवाई चलती जब तक वो ठीक रहती और फिर वो  थोड़े दिन बाद बीमार पड़ जाती ।मैं उनको सरकारी अस्पताल में लेकर जाता था लेकिन सरकारी अस्पताल में डाक्टर  दवाई बाहर की लिखते जो ₹150-500  की होती जो की मैं वहन नहीं कर पाता क्योंकि पिताजी पैसे समय पर नहीं भेज पाते और जो आते वो पुराने कर्जे को चुकाने में चले जाते।एक बार मैं बहुत परेशान था मेरे पास पैसे नहीं थे और मां बार बार बीमार हो जाती थी।मैं एकांत समय में डाक्टर से मिलने की प्लानिंग की शायद डाक्टर कोई मदद करें और दवाई अंदर की ही लिख दे। मैंने शाम का समय चुना जब डाक्टर...

Chapter-2-4

 मेरे दोस्त बोले हम जा रहे हैं किसी से मिलने इसकी शिकायत डीएसपी से करेंगे।मैंने कहा जो करना है करो मोबाइल तो गया ।मैं कमरे पर पहुंच गया घण्टे दो घण्टे बाद मेरे दोस्त भी आ गए। थोड़ी देर बाद अवि भी अपने पापा के साथ कमरे पर आ गया। उसके पापा सारी बात पूछी और बोले मोबाइल इसके पास नहीं है और अगर होगा तो मैं पता और कर लूंगा तुम दोस्त हो इसके ये मेरा बेटा वैसे ही तुम मेरे बच्चे।ऐसे बेवजह बदनामी होती है मैंने इसके फूफा से बात करली है फोन जिसके भी पास होगा पता चल जाएगा।अवि के साथ जाओ इसको एक रिचार्ज दिला लाओ मैं उसके साथ गया वो रास्ते में बोला तू मुझ पर ग़लत शक कर रहा है तू ग़रीब लड़का है तेरी ग़रीबी की हालत मैं जानता हूं मैं तेरा मोबाइल लूंगा क्या तुझे मैं सबसे अच्छा दोस्त समझता हूं मैंने वहां जूते खोलकर नहीं दिखाए क्योंकि उसमें मेरे नशे करने की सामग्री थी और वो मेरे फूफा को पता चल जाती और फूफा मेरे बाप को बता देते ।मेरी ढंग से तुड़ाई होती। इसलिए नहीं दिखा पाया पर तेरा फोन मैंने नहीं लिया। मैंने कहा कोई बात नहीं ।वापस कमरे पर आए उसके ने दिलासा दिया और चले गए।मेरे दोस्त बड़े परेशान थे आपस ...

Chapter-2-3

 ठीक है उन्होंने कहा।इसके कुछ दिनों बाद मेरा  दोस्त मेरे घर आया मुझसे कहने लगा अलवर चलेगा क्या मैंने बोला मां की तबीयत ख़राब है  कुछ कह नहीं सकता हूं।वो चला गया ।उसके जाने के घण्टे दो घण्टे बाद ही मैं भी अलवर पहुंच गया। मैं जैसे ही पहुंचा तो मैंने देखा तो मेरे रुममेट मेरा मामा वाला मोबाइल ढूंढ रहे थे  एक दोस्त कह रहा था मैंने यहां रखा था इतने में मेरा गांव वाला मित्र अवी भी आ गया वह लैट्रिन गया हुआ था दूसरा कह रहा था मैं दूध की थैली लिए आ गया था बोला तू तो कल आने वाला था अवी ने पूछा।मैंने बोला मां ने भेज दिया छुट्टी नहीं करनी । अभी तो मोबाइल इसके पास था इतनी ही देर में कहां गया?पलंग के नीचे देखो । मैं फो़न लगाकर देखता हूं ।फोन तो कह रहा है जिससे आप कोल कर रहे हो वहां पहुंच संभव नहीं है।  अवि कहता है कोई उठा तो नहीं गया? पहले नम्बर बंद करवाओ कहीं कोई काण्ड कर दे और तुम फंस जाओ चलो कस्टमर केयर। मेरे दोनों रूममेट और मैं घबराहट में थे ।हम पैदल ही कस्टमर केयर पर गये । मोबाइल को ढूंढने के लिए पुलिस में एफआईआर करवानी पड़ेगी मेरे रूममेट ने कहा मेरा एक मिलने वाला कांस्टे...

Chapter-2-2

 हम जैसों को कुछ समझता ही नहीं था। कोलेज के फ्रसट ईयर के दौरान उससे मुलाक़ात हुई मैं फलां फलां कोलेज में हूं बी फार्मा कर रहा हूं ।मैंने अपने बारे में बता दिया।फिर बोला तेरे फोन नम्बर दे मैंने बोला मेरे मामा का फोन है पर मेरे पास सिम नहीं वो बोला मैं नया सिम दिला दूंगा।मैंने बोला मेरे दोस्त ने सिम ले रखी है ।फोन घर पर मुझे चलाना नहीं आता ।वह बोला मैं सिखा दूंगा चल। मेरे घर आ गया और बोला देख ऐसे खोलते हैं ये गुडिया खराबी नहीं मैं वोलपेपर है । यहां सिम लगती है।वह मेरी मां से भी मिला प्रणाम किया बोला घनश्याम अच्छा लड़का है इसने मुझे बताया नहीं की आप इतने ग़रीब हो नहीं तो पापा को बोलकर इसके अच्छे नम्बर भिजवाता कोई बात नहीं कभी ज़रूरत हो तो बताना मुझे अपना ही समझो।और वो चला गया।कई एक दिनों बाद उसके बाप  फोन आया बोला मैं उसका पापा बोले रहा हूं तुम कहां हो मैं कमरे पर हूं । उन्होंने मुझे एक चौराहे पर बुलाया और बाइक पर बिठाकर कहीं ले गए बोले तुझे मेरे बेटे ने कोई मोबाइल दिलाया है क्या मैंने बताया की मेरे पास मेरे मामा का फोन है और उसका बिल भी है।

Chapter-2-1

 दूसरे दोस्त ने फोन छीनकर काट दिया हम तो सोच रहे थे तुम यूं ही फोन लगाकर बात करने का बहाना कर रहा है और तूने सच में कोल लगा दिया।उसने बोला हंसते हुए कहा मैं किसी से डरता नहीं ।मैं तेरी शादी इसी से करवाऊंगा।अब आगे क्या हुआ पता नहीं आज 15साल हो गए।  मेरे बड़े मामा ने नया फ़ोन ख़रीदा था नोकिया 3310 उन्हें चलाना नहीं आता बार बार स्क्रीन पर एक गुड़िया सी आ जाती ।हम सब सोचते इस फ़ोन में कुछ गडबड है ।मामा भी समझ नहीं पाते थे।वो उससे परेशान थे उस दौर में किसी के फ़ोन भी नहीं आते थे यूंही पड़ा रहता था उनकी जेब में और उनको चलाना भी नहीं आता था दूसरी स्क्रीन पर वो गुडिया आ जाती थी।मेरे मामा से मैंने कहा कुछ समय मुझे दे दो मैं सीखता हूं और फिर आपको सिखा दूंगा तब आप रख लेना ।मामा राज़ी हो गए मैं उसको लेकर शहर चला गया। जहां मैंने कमरा ले रखा था। मेरे दो और दोस्त मेरे साथ रहते थे । वो बोले इसमें नई सिम हम डलवा लेते हैं हमने सिम डलवा ली और कभी वो अपने रिश्तेदारों को तो कभी अपने दोस्तों को फोन करते।मेरे तो किसी रिश्तेदार के पास फोन था नहीं तो मैं तो उनकी बातें ही सुनता एक दिन मेरा स्कूल का ए...

Chapter-1-5

 मैंने बारहवीं पास की और ज़िले के बडे़ सरकारी कोलेज में एडमिशन लिया।उसी कोलेज के पहले ही दिन मेरा एक पांचवी कक्षा में साथ पढ़ा हुआ आठ साल बाद मिला ।वह अपने दोस्तों के साथ था।वह पैसे वाला था और वैसे ही उसके दोस्त लग रहे थे ।मैं उससे मुलाक़ात करना चाह रहा था किन्तु हिचकिचा रहा था उसी दिन  दो चार बार आमना सामना हुआ लेकिन वह शायद पहचान नहीं पाया ।मैं कैम्पस की एक सीट पर जाकर बैठ गया।वह भी अपने दोस्तों से अलग होकर मेरी बगल वाली सीट पर आकर बैठ गया।शायद उसने हल्का सा पहचान लिया था पर उसने मुझसे बात नहीं की। शुरुआत मैंने ही की क्या वह मेरे गांव में कभी गया था पांचवी में पढ़ता था?उसने कहा हां फिर मैंने कहा  तुम्हारा नाम ऋषि है?उसने कहा हां,मुझे पहचाना ..तुम वही हो जिसके एक हाथ में दो अंगूठे हैं इतना कहते ही दोनों हंसने लगे और गले लगा लिया शायद उसे मेरा नाम याद नहीं था।  वो उससे आखिरी मुलाकात थी आजतक दुबारा मिलान नहीं हुआ ।वहीं एक नया दोस्त मिला जो की मेरे ही‌ विषय का था तुषार। एक दिन मैं यूं ही‌ बैठा था वह अपने दोस्तों के साथ अपने ही एक दोस्त का फोन लेकर किसी लड़की के भाई के ...